श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश  »  श्लोक 8

 
श्लोक
उत्तस्थुस्ते कुशलिनो निद्रापाय इवाञ्जसा ।
पितुर्विद्वांस्तपोवीर्यं रामश्चक्रे सुहृद्वधम् ॥ ८ ॥
 
शब्दार्थ
उत्तस्थु:—तुरन्त उठ खड़े हुए; ते—परशुराम की माता तथा भाई; कुशलिन:—कुशलपूर्वक; निद्रा-अपाये—गहरी नींद के अन्त में; इव—सदृश; अञ्जसा—तुरन्त; पितु:—अपने पिता का; विद्वान्—अवगत; तप:—तपस्या; वीर्यम्—बल; राम:—परशुराम ने; चक्रे— सम्पन्न किया; सुहृत्-वधम्—अपने परिजनों का वध ।.
 
अनुवाद
 
 तत्पश्चात् जमदग्नि के वर से भगवान् परशुराम की माता तथा उनके सारे भाई तुरन्त जीवित हो उठे और वे सभी अत्यन्त प्रसन्न हुए मानो गहरी नींद से जगे हों। परशुराम ने अपने पिता के आदेश पर अपने परिजनों का वध कर दिया था क्योंकि वे अपने पिता के बल, तपस्या तथा विद्वत्ता से परिचित थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥