श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 16

 
श्लोक
कुशात् प्रति: क्षात्रवृद्धात् सञ्जयस्तत्सुतो जय: ।
तत: कृत: कृतस्यापि जज्ञे हर्यबलो नृप: ॥ १६ ॥
 
शब्दार्थ
कुशात्—कुश से; प्रति:—प्रति नामक पुत्र; क्षात्रवृद्धात्—क्षत्रवृद्ध का पौत्र; सञ्जय:—सञ्जय; तत्-सुत:—उसका पुत्र; जय:—जय; तत:—उससे; कृत:—कृत; कृतस्य—कृत का; अपि—भी; जज्ञे—उत्पन्न हुआ; हर्यबल:—हर्यबल; नृप:—राजा ।.
 
अनुवाद
 
 क्षत्रवृद्ध के पौत्र कुश से प्रति नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। प्रति का पुत्र सञ्जय, सञ्जय का पुत्र जय, जय का पुत्र कृत और कृत का पुत्र राजा हर्यबल हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥