श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 5

 
श्लोक
तत्पुत्र: केतुमानस्य जज्ञे भीमरथस्तत: ।
दिवोदासो द्युमांस्तस्मात् प्रतर्दन इति स्मृत: ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
तत्-पुत्र:—उसका (धन्वन्तरि का) पुत्र; केतुमान्—केतुमान; अस्य—उसका; जज्ञे—जन्म लिया; भीमरथ:—भीमरथ नाम के पुत्र ने; तत:—उससे; दिवोदास:—दिवोदास; द्युमान्—द्युमान; तस्मात्—उससे; प्रतर्दन:—प्रतर्दन; इति—इस प्रकार; स्मृत:—ज्ञात ।.
 
अनुवाद
 
 धन्वन्तरि का पुत्र केतुमान हुआ और उसका पुत्र भीमरथ था। भीमरथ का पुत्र दिवोदास था और उसका पुत्र द्युमान हुआ जो प्रतर्दन भी कहलाता था।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥