श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 6

 
श्लोक
स एव शत्रुजिद् वत्स ऋतध्वज इतीरित: ।
तथा कुवलयाश्वेति प्रोक्तोऽलर्कादयस्तत: ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
स:—वह, द्युमान; एव—निस्सन्देह; शत्रुजित्—शत्रुजित; वत्स:—वत्स; ऋतध्वज:—ऋतध्वज; इति—इस तरह; ईरित:—विख्यात; तथा—और; कुवलयाश्व—कुवलयाश्व; इति—इस प्रकार; प्रोक्त:—विख्यात; अलर्क-आदय:—अलर्क तथा अन्य पुत्र; तत:— उससे ।.
 
अनुवाद
 
 द्युमान शत्रुजित, वत्स, ऋतध्वज तथा कुवलयाश्व नामों से भी विख्यात था। उससे अलर्क तथा अन्य पुत्र उत्पन्न हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥