श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ  »  श्लोक 25

 
श्लोक
विविंशते: सुतो रम्भ: खनीनेत्रोऽस्य धार्मिक: ।
करन्धमो महाराज तस्यासीदात्मजो नृप ॥ २५ ॥
 
शब्दार्थ
विविंशते:—विविंशति से; सुत:—पुत्र; रम्भ:—रम्भ; खनीनेत्र:—खनीनेत्र; अस्य—रम्भ का; धार्मिक:—अत्यन्त धार्मिक; करन्धम:—करन्धम; महाराज—हे राजा; तस्य—उसके (खनीनेत्र से); आसीत्—था; आत्मज:—पुत्र; नृप—हे राजा ।.
 
अनुवाद
 
 विविंशति के पुत्र का नाम रम्भ था जिसका पुत्र अत्यन्त महान् एवं धार्मिक राजा खनीनेत्र हुआ। हे राजा, खनीनेत्र का पुत्र राजा करन्धम हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥