श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ  »  श्लोक 30

 
श्लोक
तत्सुत: केवलस्तस्माद् धुन्धुमान्वेगवांस्तत: ।
बुधस्तस्याभवद् यस्य तृणबिन्दुर्महीपति: ॥ ३० ॥
 
शब्दार्थ
तत्-सुत:—उसका (नर का) पुत्र; केवल:—केवल था; तस्मात्—उससे; धुन्धुमान्—धुन्धुमान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ; वेगवान्— वेगवान्; तत:—उससे; बुध:—बुध; तस्य—उसके; अभवत्—था; यस्य—जिसका (बुध का); तृणबिन्दु:—तृणबिन्दु; महीपति:— राजा ।.
 
अनुवाद
 
 नर का पुत्र केवल हुआ और उसका पुत्र धुन्धुमान था, जिसका पुत्र वेगवान हुआ। वेगवान का पुत्र बुध था और बुध का पुत्र तृणबिन्दु था जो इस पृथ्वी का राजा बना।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥