श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 20: पूरु का वंश  »  श्लोक 2

 
श्लोक
जनमेजयो ह्यभूत् पूरो: प्रचिन्वांस्तत्सुतस्तत: ।
प्रवीरोऽथ मनुस्युर्वै तस्माच्चारुपदोऽभवत् ॥ २ ॥
 
शब्दार्थ
जनमेजय:—राजा जनमेजय; हि—निस्सन्देह; अभूत्—उत्पन्न हुआ; पूरो:—पूरु से; प्रचिन्वान्—प्रचिन्वान; तत्—उसका; सुत:—पुत्र; तत:—उससे (प्रचिन्वान से); प्रवीर:—प्रवीर; अथ—तत्पश्चात्; मनुस्यु:—प्रवीर का पुत्र मनुस्यु; वै—निस्सन्देह; तस्मात्—उससे; चारुपद:—राजा चारुपद; अभवत्—हुआ ।.
 
अनुवाद
 
 पूरु के ही इस वंश में राजा जनमेजय उत्पन्न हुआ। उसका पुत्र प्रचिन्वान था और उसका पुत्र था प्रवीर। तत्पश्चात् प्रवीर का पुत्र मनुस्यु हुआ जिसका पुत्र चारुपद था।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥