श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 31-33

 
श्लोक
शान्ते: सुशान्तिस्तत्पुत्र: पुरुजोऽर्कस्ततोऽभवत् ।
भर्म्याश्वस्तनयस्तस्य पञ्चासन्मुद्गलादय: ॥ ३१ ॥
यवीनरो बृहद्विश्व: काम्पिल्ल: सञ्जय: सुता: ।
भर्म्याश्व: प्राह पुत्रा मे पञ्चानां रक्षणाय हि ॥ ३२ ॥
विषयाणामलमिमे इति पञ्चालसंज्ञिता: ।
मुद्गलाद् ब्रह्मनिर्वृत्तं गोत्रं मौद्गल्यसंज्ञितम् ॥ ३३ ॥
 
शब्दार्थ
शान्ते:—शान्ति का; सुशान्ति:—सुशान्ति; तत्-पुत्र:—उसका पुत्र; पुरुज:—पुरुज; अर्क:—अर्क; तत:—उससे; अभवत्—उत्पन्न हुए; भर्म्याश्व:—भर्म्याश्व; तनय:—पुत्र; तस्य—उसके; पञ्च—पाँच पुत्र; आसन्—थे; मुद्गल-आदय:—मुद्गल इत्यादि; यवीनर:— यवीनर; बृहद्विश्व:—बृहद्विश्व; काम्पिल्ल:—काम्पिल्ल; सञ्जय:—सञ्जय; सुता:—पुत्र; भर्म्याश्व:—भर्म्याश्व ने; प्राह—कहा; पुत्रा:— पुत्र; मे—मेरे; पञ्चानाम्—पाँचों की; रक्षणाय—सुरक्षा के लिए; हि—निस्सन्देह; विषयाणाम्—विभिन्न राज्यों का; अलम्—दक्ष; इमे—ये सभी; इति—इस प्रकार; पञ्चाल—पञ्चाल; संज्ञिता:—नामधारी; मुद्गलात्—मुद्गल से; ब्रह्म-निर्वृत्तम्—ब्राह्मणों से युक्त; गोत्रम्—गोत्र; मौद्गल्य—मोद्गल; संज्ञितम्—नामधारी ।.
 
अनुवाद
 
 शान्ति का पुत्र सुशान्ति था, सुशान्ति का पुत्र पुरुज हुआ, पुरुज का अर्क और अर्क का पुत्र भर्म्याश्व था। भर्म्याश्व के पाँच पुत्र हुए—मुद्गल, यवीनर, बृहद्विश्व, काम्पिल्ल तथा संजय। भर्म्याश्व ने अपने बेटों से कहा : मेरे बेटो, तुम लोग मेरे पाँचों राज्यों का भार सँभालो क्योंकि तुम ऐसा करने के लिए पर्याप्त सक्षम हो। इस तरह उसके पाँचों पुत्र पञ्चाल कहलाये। मुद्गल से ब्राह्मणों का गोत्र चला जो मौद्गल्य कहलाया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥