श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 11

 
श्लोक
ततश्चाक्रोधनस्तस्माद् देवातिथिरमुष्य च ।
ऋक्षस्तस्य दिलीपोऽभूत् प्रतीपस्तस्य चात्मज: ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
तत:—उससे; च—भी; अक्रोधन:—अक्रोधन नामक पुत्र; तस्मात्—उससे; देवातिथि:—देवातिथि; अमुष्य—उसका; च—भी; ऋक्ष:—ऋक्ष; तस्य—उसके; दिलीप:—दिलीप; अभूत्—उत्पन्न हुआ; प्रतीप:—प्रतीप; तस्य—उसका; च—तथा; आत्म-ज:— पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 अयुतायु का पुत्र अक्रोधन, अक्रोधन का देवातिथि, देवातिथि का ऋक्ष, ऋक्ष का दिलीप और दिलीप का पुत्र प्रतीप हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥