श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 27-28

 
श्लोक
शापान्मैथुनरुद्धस्य पाण्डो: कुन्त्यां महारथा: ।
जाता धर्मानिलेन्द्रेभ्यो युधिष्ठिरमुखास्त्रय: ॥ २७ ॥
नकुल: सहदेवश्च माद्रय‍ां नासत्यदस्रयो: ।
द्रौपद्यां पञ्च पञ्चभ्य: पुत्रास्ते पितरोऽभवन् ॥ २८ ॥
 
शब्दार्थ
शापात्—शाप से; मैथुन-रुद्धस्य—विषयी जीवन रोक देने से; पाण्डो:—पाण्डु का; कुन्त्याम्—कुन्ती के गर्भ में; महा-रथा:—बड़े बड़े वीर; जाता:—उत्पन्न हुए; धर्म—महाराज धर्म या धर्मराज; अनिल—वायुदेव; इन्द्रेभ्य:—तथा वर्षा के देवता इन्द्र के द्वारा; युधिष्ठिर—युधिष्ठिर; मुखा:—इत्यादि; त्रय:—तीन पुत्र (युधिष्ठिर, भीम तथा अर्जुन); नकुल:—नकुल; सहदेव:—सहदेव; च—भी; माद्र्याम्—माद्री के गर्भ से; नासत्य-दस्रयो:—नासत्य और दस्र अश्विनीकुमारों द्वारा; द्रौपद्याम्—द्रौपदी के गर्भ से; पञ्च—पाँच; पञ्चभ्य:—पाँचों भाइयों युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव द्वारा; पुत्रा:—पुत्र; ते—वे; पितर:—चाचा; अभवन्—बने ।.
 
अनुवाद
 
 एक मुनि के द्वारा शापित होने से पाण्डु का विषयी जीवन अवरुद्ध हो गया अतएव उसकी पत्नी कुन्ती के गर्भ से तीन पुत्र युधिष्ठिर, भीम तथा अर्जुन उत्पन्न हुए जो क्रमश: धर्मराज, वायुदेव तथा इन्द्रदेव के पुत्र थे। पाण्डु की दूसरी पत्नी माद्री ने नकुल तथा सहदेव को जन्म दिया जो दोनों अश्विनीकुमारों द्वारा उत्पन्न थे। युधिष्ठिर इत्यादि पाँचों भाइयों ने द्रौपदी के गर्भ से पाँच पुत्र उत्पन्न किये। ये पाँचों पुत्र तुम्हारे चाचा थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥