श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 29

 
श्लोक
युधिष्ठिरात् प्रतिविन्ध्य: श्रुतसेनो वृकोदरात् ।
अर्जुनाच्छ्रुतकीर्तिस्तु शतानीकस्तु नाकुलि: ॥ २९ ॥
 
शब्दार्थ
युधिष्ठिरात्—महाराज युधिष्ठिर से; प्रतिविन्ध्य:—प्रतिविन्ध्य; श्रुतसेन:—श्रुतसेन; वृकोदरात्—भीम से; अर्जुनात्—अर्जुन से; श्रुतकीर्ति:—श्रुतकीर्ति; तु—निस्सन्देह; शतानीक:—शतानीक; तु—निस्सन्देह; नाकुलि:—नकुल के ।.
 
अनुवाद
 
 युधिष्ठिर से प्रतिविन्ध्य, भीम से श्रुतसेन, अर्जुन से श्रुतकीर्ति तथा नकुल से शतानीक नामक पुत्र हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥