श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 3

 
श्लोक
द्रुपदाद् द्रौपदी तस्य धृष्टद्युम्नादय: सुता: ।
धृष्टद्युम्नाद् धृष्टकेतुर्भार्म्या: पाञ्चालका इमे ॥ ३ ॥
 
शब्दार्थ
द्रुपदात्—द्रुपद से; द्रौपदी—पाण्डवों की विख्यात पत्नी द्रौपदी; तस्य—उसके (द्रुपद के); धृष्टद्युम्न-आदय:—धृष्टद्युम्न इत्यादि; सुता:—पुत्र; धृष्टद्युम्नात्—धृष्टद्युम्न से; धृष्टकेतु:—धृष्टकेतु नामक पुत्र; भार्म्या:—भर्म्याश्व के सारे वंशज; पाञ्चालका:—पाञ्चालक कहलाते हैं; इमे—ये सभी ।.
 
अनुवाद
 
 महाराज द्रुपद से द्रौपदी उत्पन्न हुई। महाराज द्रुपद के कई पुत्र भी थे जिनमें धृष्टद्युम्न प्रमुख था। उसके पुत्र का नाम धृष्टकेतु था। ये सारे पुरुष भर्म्याश्व के वंशज या पाञ्चालवंशी कहलाते हैं।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥