श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 41

 
श्लोक
तस्माच्च वृष्टिमांस्तस्य सुषेणोऽथ महीपति: ।
सुनीथस्तस्य भविता नृचक्षुर्यत् सुखीनल: ॥ ४१ ॥
 
शब्दार्थ
तस्मात्—उससे (शुचिरथ); च—भी; वृष्टिमान्—वृष्टिमान; तस्य—उसका पुत्र; सुषेण:—सुषेण; अथ—तत्पश्चात्; मही-पति:—सारे संसार का सम्राट; सुनीथ:—सुनीथ; तस्य—उसका; भविता—होगा; नृचक्षु:—पुत्र नृचक्षु; यत्—उससे; सुखीनल:—सुखीनल ।.
 
अनुवाद
 
 शुचिरथ का पुत्र वृष्टिमान होगा और उसका पुत्र सुषेण नाम का चक्रवर्ती राजा होगा। सुषेण का पुत्र सुनीथ होगा, उसका पुत्र नृचक्षु होगा और नृचक्षु का पुत्र सुखीनल होगा।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥