श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 49

 
श्लोक
सुनीथ: सत्यजिदथ विश्वजिद् यद् रिपुञ्जय: ।
बार्हद्रथाश्च भूपाला भाव्या: साहस्रवत्सरम् ॥ ४९ ॥
 
शब्दार्थ
सुनीथ:—सुबल से सुनीथ उत्पन्न होगा; सत्यजित्—सत्यजित; अथ—उससे; विश्वजित्—विश्वजित; यत्—उससे; रिपुञ्जय:—रिपुञ्जय; बार्हद्रथा:—बृहद्रथ की वंशावली में; च—भी; भूपाला:—सारे राजा; भाव्या:—होंगे; साहस्र-वत्सरम्—एक हजार वर्षों तक लगातार ।.
 
अनुवाद
 
 सुबल से सुनीथ, सुनीथ से सत्यजित, सत्यजित से विश्वजित एवं विश्वजित से रिपुञ्जय उत्पन्न होगा। ये सभी पुरुष बृहद्रथवंशी होंगे और ये संसार पर एक हजार वर्षों तक राज्य करेंगे।
 
तात्पर्य
 यह जरासन्ध से प्रारम्भ होकर एक हजार वर्षों तक पृथ्वी
पर राज्य करने वाले उपर्युक्त राजाओं का इतिहास है।
 
इस प्रकार श्रीमद्भागवत के नवम स्कन्ध के अन्तर्गत “अजमीढ के वंशज” नामक बाईसवें अध्याय के भक्तिवेदान्त तात्पर्य पूर्ण हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥