श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 6

 
श्लोक
वसुस्तस्योपरिचरो बृहद्रथमुखास्तत: ।
कुशाम्बमत्स्यप्रत्यग्रचेदिपाद्याश्च चेदिपा: ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
वसु:—वसु नामक पुत्र; तस्य—उसका (कृती का); उपरिचर:—वसु का उपनाम; बृहद्रथ-मुखा:—बृहद्रथ इत्यादि; तत:—उससे (वसु से); कुशाम्ब—कुशाम्ब; मत्स्य—मत्स्य; प्रत्यग्र—प्रत्यग्र; चेदिप-आद्या:—चेदिप आदि; च—भी; चेदि-पा:—चेदि राज्य के सभी शासक ।.
 
अनुवाद
 
 कृती का पुत्र उपरिचर वसु था और उसके पुत्रों में, जिनमें बृहद्रथ प्रमुख था, कुशाम्ब, मत्स्य, प्रत्यग्र तथा चेदिप थे। उपरिचर वसु के सारे पुत्र चेदि राज्य के शासक बने।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥