श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 1

 
श्लोक
श्रीशुक उवाच
अनो: सभानरश्चक्षु: परेष्णुश्च त्रय: सुता: ।
सभानरात् कालनर: सृञ्जयस्तत्सुतस्तत: ॥ १ ॥
 
शब्दार्थ
श्री-शुक: उवाच—श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा; अनो:—अनु का, जो ययाति के चार पुत्रों में से चौथा बेटा था; सभानर:—सभानर; चक्षु:—चक्षु; परेष्णु:—परेष्णु; च—भी; त्रय:—तीन; सुता:—बेटे; सभानरात्—सभानर से; कालनर:—कालनर; सृञ्जय:—सृञ्जय; तत्-सुत:—कालनर का पुत्र; तत:—तत्पश्चात् ।.
 
अनुवाद
 
 शुकदेव गोस्वामी ने कहा : ययाति के चतुर्थ पुत्र अनु के तीन पुत्र हुए जिनके नाम थे—सभानर, चक्षु तथा परेष्णु। हे राजा, सभानर के कालनर नाम का एक पुत्र हुआ और कालनर से सृञ्जय नामक पुत्र उत्पन्न हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥