श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 11

 
श्लोक
बृहद्रथो बृहत्कर्मा बृहद्भ‍ानुश्च तत्सुता: ।
आद्याद् बृहन्मनास्तस्माज्जयद्रथ उदाहृत: ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
बृहद्रथ:—बृहद्रथ; बृहत्कर्मा—बृहत्कर्मा; बृहद्भानु:—बृहद्भानु; च—भी; तत्-सुता:—पृथुलाक्ष के पुत्र; आद्यात्—सबसे बड़े (बृहद्रथ) से; बृहन्मना:—बृहद्मना उत्पन्न हुआ; तस्मात्—उससे; जयद्रथ:—जयद्रथ; उदाहृत:—उसके पुत्र के रूप में विख्यात हुआ ।.
 
अनुवाद
 
 पृथुलाक्ष के पुत्र थे बृहद्रथ, बृहत्कर्मा तथा बृहद्भानु। ज्येष्ठ पुत्र बृहद्रथ से बृहद्मना नाम का पुत्र हुआ और बृहद्मना से जयद्रथ हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥