श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 15

 
श्लोक
आरब्धस्तस्य गान्धारस्तस्य धर्मस्ततो धृत: ।
धृतस्य दुर्मदस्तस्मात् प्रचेता: प्राचेतस: शतम् ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
आरब्ध:—आरब्ध (सेतु का पुत्र); तस्य—उसका (आरब्ध का); गान्धार:—गान्धार; तस्य—उसका पुत्र; धर्म:—धर्म; तत:—उससे; धृत:—धृत; धृतस्य—धृत का; दुर्मद:—दुर्मद; तस्मात्—उससे; प्रचेता:—प्रचेता; प्राचेतस:—प्रचेता के; शतम्—एक सौ पुत्र थे ।.
 
अनुवाद
 
 सेतु का पुत्र आरब्ध था, आरब्ध का पुत्र गान्धार हुआ और गान्धार का पुत्र धर्म था। धर्म का पुत्र धृत, धृत का दुर्मद और दुर्मद का पुत्र प्रचेता था जिसके एक सौ पुत्र हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥