श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 17

 
श्लोक
त्रिभानुस्तत्सुतोऽस्यापि करन्धम उदारधी: ।
मरुतस्तत्सुतोऽपुत्र: पुत्रं पौरवमन्वभूत् ॥ १७ ॥
 
शब्दार्थ
त्रिभानु:—त्रिभानु; तत्-सुत:—भानुमान का पुत्र; अस्य—उसका (त्रिभानु का); अपि—भी; करन्धम:—करन्धम; उदार-धी:— अत्यन्त उदार बुद्धिवाला; मरुत:—मरुत; तत्-सुत:—करन्धम का पुत्र; अपुत्र:—नि:सन्तान; पुत्रम्—पुत्र के रूप में; पौरवम्— पूरुवंश का पुत्र महाराज दुष्मन्त; अन्वभूत्—गोद ले लिया ।.
 
अनुवाद
 
 भानुमान का पुत्र त्रिभानु था और उसका पुत्र उदारचेता करन्धम था। करन्धम का पुत्र मरुत था जिसके कोई पुत्र न था अतएव उसने पूरुवंशी पुत्र (महाराज दुष्मन्त) को पुत्र रूप में गोद ले लिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥