श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 22

 
श्लोक
धर्मस्तु हैहयसुतो नेत्र: कुन्ते: पिता तत: ।
सोहञ्जिरभवत् कुन्तेर्महिष्मान् भद्रसेनक: ॥ २२ ॥
 
शब्दार्थ
धर्म: तु—किन्तु धर्म; हैहय-सुत:—हैहय का पुत्र बना; नेत्र:—नेत्र; कुन्ते:—कुन्ति का; पिता—पिता; तत:—उससे; सोहञ्जि:— सोहञ्जि; अभवत्—हुआ; कुन्ते:—कुन्ति पुत्र; महिष्मान्—महिष्मान; भद्रसेनक:—भद्रसेनक ।.
 
अनुवाद
 
 हैहय का पुत्र धर्म था और धर्म का पुत्र नेत्र था जो कुन्ति का पिता था। कुन्ति से सोहञ्जि, सोहञ्जि से महिष्मान तथा महिष्मान से भद्रसेनक उत्पन्न हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥