श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 32

 
श्लोक
तस्य पत्नीसहस्राणां दशानां सुमहायशा: ।
दशलक्षसहस्राणि पुत्राणां तास्वजीजनत् ॥ ३२ ॥
 
शब्दार्थ
तस्य—शशबिन्दु की; पत्नी—पत्नियाँ; सहस्राणाम्—हजारों में से; दशानाम्—दस; सु-महा-यशा:—अत्यन्त विख्यात; दश—दस; लक्ष—लाख; सहस्राणि—हजार; पुत्राणाम्—पुत्रों का; तासु—उनमें; अजीजनत्—उसने उत्पन्न किया ।.
 
अनुवाद
 
 सुप्रसिद्ध शशबिन्दु के दस हजार पत्नियाँ थीं और उनमें से हर एक से एक लाख पुत्र उत्पन्न हुए। इसलिए उसके पुत्रों की संख्या एक अरब थी।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥