श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 33

 
श्लोक
तेषां तु षट्‍प्रधानानां पृथुश्रवस आत्मज: ।
धर्मो नामोशना तस्य हयमेधशतस्य याट् ॥ ३३ ॥
 
शब्दार्थ
तेषाम्—उन पुत्रों में से; तु—लेकिन; षट् प्रधानानाम्—जिसमें छह प्रमुख थे; पृथुश्रवस:—पृथुश्रवा का; आत्मज:—पुत्र; धर्म:—धर्म; नाम—नामक; उशना—उशना; तस्य—उसका; हयमेध-शतस्य—एक सौ अश्वमेघ यज्ञों का; याट्—सम्पन्न करने वाला ।.
 
अनुवाद
 
 इन अनेक पुत्रों में से छह अग्रणी थे यथा पृथुश्रवा तथा पृथुकीर्ति। पृथुश्रवा का पुत्र धर्म कहलाया और उसका पुत्र उशना कहलाया। उशना ने एक सौ अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किये।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥