श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 3: सुकन्या तथा च्यवन मुनि का विवाह  »  श्लोक 2

 
श्लोक
सुकन्या नाम तस्यासीत् कन्या कमललोचना ।
तया सार्धं वनगतो ह्यगमच्च्यवनाश्रमम् ॥ २ ॥
 
शब्दार्थ
सुकन्या—सुकन्या; नाम—नामक; तस्य—उसकी (शर्याति की); आसीत्—थी; कन्या—पुत्री; कमल-लोचना—कमल जैसे नेत्रों वाली; तया सार्धम्—उसके साथ; वन-गत:—जंगल में गया हुआ; हि—निस्सन्देह; अगमत्—वह गया; च्यवन-आश्रमम्—च्यवन मुनि के आश्रम में ।.
 
अनुवाद
 
 शर्याति के सुकन्या नामक एक सुन्दर कमलनेत्री कन्या थी जिसके साथ वे जंगल में च्यवन मुनि के आश्रम को देखने गये।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥