श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 6: सौभरि मुनि का पतन  »  श्लोक 9

 
श्लोक
ज्ञात्वा पुत्रस्य तत् कर्म गुरुणाभिहितं नृप: ।
देशान्नि:सारयामास सुतं त्यक्तविधिं रुषा ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
ज्ञात्वा—जान लेने पर; पुत्रस्य—अपने पुत्र की; तत्—वह; कर्म—करनी; गुरुणा—गुरु (वसिष्ठ) द्वारा; अभिहितम्—सूचित किया गया; नृप:—राजा (इक्ष्वाकु) ने; देशात्—देश से; नि:सारयाम् आस—निकाल दिया; सुतम्—पुत्र को; त्यक्त-विधिम्—क्योंकि उसने विधान का उल्लंघन किया था; रुषा—क्रोध में आकर ।.
 
अनुवाद
 
 जब राजा इक्ष्वाकु वसिष्ठ द्वारा बताये जाने पर समझ गये कि उनके पुत्र विकुक्षि ने क्या किया है तो वे अत्यन्त क्रुद्ध हुए। इस प्रकार उन्होंने विकुक्षि को देश छोडऩे की आज्ञा दे दी क्योंकि उसने विधि-विधान का उल्लंघन किया था।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥