श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 7: राजा मान्धाता के वंशज  »  श्लोक 9

 
श्लोक
यदि वीरो महाराज तेनैव त्वां यजे इति ।
तथेति वरुणेनास्य पुत्रो जातस्तु रोहित: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
यदि—यदि; वीर:—पुत्र होगा; महाराज—हे महाराज परीक्षित; तेन एव—उस पुत्र से भी; त्वाम्—तुमको; यजे—मैं यज्ञ करूँगा; इति—इस प्रकार; तथा—जैसी तुम्हारी इच्छा; इति—इस प्रकार स्वीकार किया गया; वरुणेन—वरुण द्वारा; अस्य—महाराज हरिश्चन्द्र का; पुत्र:—पुत्र; जात:—उत्पन्न हुआ; तु—निस्सन्देह; रोहित:—रोहित नामक ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा परीक्षित, हरिश्चन्द्र ने वरुण से याचना की, “हे प्रभु, यदि मेरे पुत्र उत्पन्न होगा तो मैं आपकी तुष्टि के लिए उसी से एक यज्ञ करूँगा।” जब हरिश्चन्द्र ने यह कहा तो वरुण ने उत्तर दिया “एवमस्तु,” वरुण के आशीर्वाद से हरिश्चन्द्र के रोहित नाम का पुत्र हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥