श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 9: अंशुमान की वंशावली  »  श्लोक 10

 
श्लोक
भगीरथ: स राजर्षिर्निन्ये भुवनपावनीम् ।
यत्र स्वपितृणां देहा भस्मीभूता: स्म शेरते ॥ १० ॥
 
शब्दार्थ
भगीरथ:—भगीरथ; स:—वह; राज-ऋषि:—सन्त राजा; निन्ये—ले गया या लाया; भुवन-पावनीम्—सारे ब्रह्माण्ड का उद्धार करने वाली गंगा को; यत्र—जिस स्थान पर; स्व-पितृणाम्—अपने पितरों के; देहा:—शरीर; भस्मीभूता:—जलकर राख हुए; स्म शेरते— पड़े हुए थे ।.
 
अनुवाद
 
 महान् एवं साधु राजा भगीरथ समस्त पतितात्माओं का उद्धार करने वाली गंगाजी को पृथ्वी पर उस स्थान में ले गये जहाँ उनके पितरों के शरीर भस्म होकर पड़े हुए थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥