श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 9: अंशुमान की वंशावली  »  श्लोक 2

 
श्लोक
दिलीपस्तत्सुतस्तद्वदशक्त: कालमेयिवान् ।
भगीरथस्तस्य सुतस्तेपे स सुमहत् तप: ॥ २ ॥
 
शब्दार्थ
दिलीप:—दिलीप; तत्-सुत:—अंशुमान का पुत्र; तत्-वत्—अपने पिता की भाँति; अशक्त:—गंगा को इस जगत में ला सकने में असमर्थ; कालम् एयिवान्—काल का शिकार हुआ और मर गया; भगीरथ: तस्य सुत:—उसके पुत्र भगीरथ ने; तेपे—तपस्या की; स:—वह; सु-महत्—बहुत बड़ी; तप:—तपस्या ।.
 
अनुवाद
 
 अंशुमान की भाँति उसका पुत्र दिलीप भी गंगा को इस भौतिक जगत में ला पाने में असमर्थ रहा और कालक्रम में उसकी भी मृत्यु हो गई। तत्पश्चात् दिलीप के पुत्र भगीरथ ने गंगा को इस भौतिक जगत में लाने के लिए अत्यन्त कठिन तपस्या की।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥