श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 9: अंशुमान की वंशावली  »  श्लोक 39

 
श्लोक
सा वै सप्त समा गर्भमबिभ्रन्न व्यजायत ।
जघ्नेऽश्मनोदरं तस्या: सोऽश्मकस्तेन कथ्यते ॥ ३९ ॥
 
शब्दार्थ
सा—वह रानी मदयन्ती; वै—निस्सन्देह; सप्त—सात; समा:—वर्ष; गर्भम्—गर्भ को; अबिभ्रत्—धारण किये रही; न—नहीं; व्यजायत—जन्म दिया; जघ्ने—प्रहार किया; अश्मना—पत्थर से; उदरम्—उदर पर; तस्या:—उसके; स:—पुत्र; अश्मक:—अश्मक; तेन—इसके कारण; कथ्यते—कहलाया ।.
 
अनुवाद
 
 मदयन्ती सात वर्षों तक बालक को गर्भ में धारण किये रही और उसने बच्चे को जन्म नहीं दिया। अतएव वसिष्ठ ने एक पत्थर से उसके पेट पर प्रहार किया जिससे बालक उत्पन्न हुआ। फलस्वरूप बच्चे का नाम अश्मक (पत्थर से उत्पन्न) पड़ा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥