श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 9: अंशुमान की वंशावली  »  श्लोक 7

 
श्लोक
धारयिष्यति ते वेगं रुद्रस्त्वात्मा शरीरिणाम् ।
यस्मिन्नोतमिदं प्रोतं विश्वं शाटीव तन्तुषु ॥ ७ ॥
 
शब्दार्थ
धारयिष्यति—धारण करेगा; ते—तुम्हारे; वेगम्—तरंगों के वेग को; रुद्र:—शिवजी; तु—निस्सन्देह; आत्मा—परमात्मा; शरीरिणाम्—समस्त शरीरधारियों का; यस्मिन्—जिसमें; ओतम्—देशान्तर, ताना; इदम्—यह सारा ब्रह्माण्ड; प्रोतम्—अंक्षाश बाना; विश्वम्—सारा विश्व; शाटी—वस्त्र; इव—सदृश; तन्तुषु—डोरों में ।.
 
अनुवाद
 
 जिस प्रकार वस्त्र के सारे डोरे लम्बाई तथा चौाई में गुँथे रहते हैं, उसी तरह यह समग्र विश्व अपने अक्षांश-देशान्तरों सहित भगवान् की विभिन्न शक्तियों में स्थित है। शिवजी भी भगवान् के अवतार हैं अतएव वे देहधारी जीव में परमात्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं।वे अपने सिर पर आपकी वेगवान तरंगों को धारण कर सकते हैं।
 
तात्पर्य
 गंगाजल भगवान् शिव के सिर पर स्थित माना जाता है। शिवजी भगवान् के अवतार हैं जो विभिन्न शक्तियों से सारे विश्व को धारण करते हैं। ब्रह्म-संहिता में (५.४५) शिवजी का वर्णन इस प्रकार हुआ है—
क्षीरं यथा दधि विकारविशेषयोगात् सञ्जायते न हि तत: पृथगस्ति हेतो:।

य: शम्भुतामपि तथा समुपैति कार्याद् गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥

“जब दूध में जामन डाला जाता है तो यह दही में बदल जाता है, किन्तु वास्तव में यह दही दूध के अतिरिक्त और कुछ नहीं होता। इसी प्रकार भगवान् गोविन्द भौतिक व्यवहार के निमित्त भगवान् शिव का रूप धारण करते हैं। मैं भगवान् गोविन्द के चरणकमलों को सादर नमस्कार करता हूँ।” शिवजी उसी प्रकार भगवान् हैं जिस प्रकार दही दूध भी है और नहीं भी है। भौतिक जगत के पालन हेतु ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर (शिव)—ये तीन अवतार हैं। शिवजी विष्णु के तमोगुणी अवतार हैं। यह जगत प्रधानत: तमोगुणी है। इसीलिए शिवजी की उपमा यहाँ सारे विश्व के अक्षांश-देशान्तर से दी गई है जो वस्त्र के तानों-बानों के समान होते हैं।

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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥